Ashant Duniyan
अशांत संसार
ऐसा प्रतीत होता है कि अब तक भिन्न-भिन्न देशों ने जो रक्षात्मक युक्तियां की थीं,वे पारस्परिक सहयोग के अभाव के कारण छिन्न-भिन्न होती जा रही हैं।
अशांत संसार प्रथम महासमर के पश्चात् जिस भीषण आर्थिक संकट ने समस्त विश्व को अपने चंगुल में जकड़ लिया था,उसकी काली छाया एक बार फिर अन्तर्राष्ट्रीय क्षितिज पर दिखाई देने लगी है।...ऐसा प्रतीत होता है कि अब तक भिन्न-भिन्न देशों ने जो रक्षात्मक युक्तियां की थीं,वे पारस्परिक सहयोग के अभाव के कारण छिन्न-भिन्न होती जा रही हैं। सम्भवतः इसी स्थिति को दृष्टि में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के अर्थ विभाग ने संसार के समस्त राष्ट्रों से अपील की है कि वे अपने यहां बेकारी न उत्पन्न होने दें,आर्थिक विकास की योजनाओं को प्रोत्साहन दें और सम्भावित मंदी को रोकने के लिए समीचीन युक्तियां करें। बात यह है कि द्वितीय महायुद्ध ने विश्व की अधिकांश आर्थिक शक्ति अमरीका के हाथों में केन्द्रित कर दी है। आर्थिक दृष्टि से इस समय संसार दो क्षेत्रों में बंटा हुआ है- डालर क्षेत्र और स्टर्लिंग क्षेत्र । अर्थात् कुछ देश ऐसे हैं जहां स्वर्ण-मुद्रा का चलन है,और कुछ ऐसे जहां चांदी की मुद्रा चलती है।अमरीका,कनाडा आदि स्वर्ण-मुद्रा के क्षेत्र हैं,जबकि ब्रिटेन और राष्ट्रमण्डल तथा यूरोप के विभिन्न देश रजत - मुद्रा के क्षेत्र में हैं। दुर्भाग्यवश रजत-मुद्रा क्षेत्र के सभी प्रदेशों में अन्न,उपभोक्ता पदार्थों तथा मशीन आदि की कमी है। इनमें रूस सम्मिलित नहीं किंतु वह अपने उत्पादित पदार्थों को अधिकतःअपने यहां ही रखता है और उनसे दूसरे देश बहुत ही कम लाभान्वित हो पाते हैं। स्वभावतः उन्हें अमरीका का मुंह देखना पड़ता है,जो अन्न,मशीन आदि सभी पदार्थों से सम्पन्न है। किंतु कठिनाई यह है कि अमरीका अपनी वस्तुओं के मूल्य-स्वरूप केवल स्वर्ण-मुद्रा लेना चाहता है, जिसकी अमरीका को छोड़कर प्रायः सभी देशों में भारी कमी है। पता चला है कि इस समय अमरीका के पास २४,४६,५९,२३,००० डालर है जो कि समस्त विश्व की स्वर्ण-:का ३।५वां भाग है। इसके विपरीत अनुमान लगाया गया है कि ब्रिटेन में,जो कि रजत-मुद्रा क्षेत्र के समस्त देशों का महाजन है,स्वर्ण और स्वर्ण मुद्रा की बड़ी कमी हो गई है। कहा जाता है कि रजत-मुद्रा वाले देशों की आर्थिक मर्यादा की सुरक्षा के लिए ब्रिटेन के पास ५० करोड़ पौंड मूल्य की स्वर्ण-मुद्रा होनी चाहिए,जबकि वहां इससे १० करोड़ पौंड कम हैं।
"> यह निस्संदेह एक विश्वव्यापी अर्थसंकट का द्योतक है। Money's. -मुद्राmystdyinbharat@gmail.com

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