The goal of human life is love
दिखावे की चिंता छोड़िए
यह सोचकर कि 'लोग क्या कहेंगे' किसी काम को करने से पहले मन दुविधा में पड़ जाता है। एक अज्ञात चिंता हमें सताने लगती है। गृहस्थ जीवन में यह बहुत आम चिंता है। इसीलिए किसी काम को करने से पहले,कुछ कहने से पहले लोग बहुत ज्यादा सोचते हैं। इस बारे में अधिक सोचना दिखावा को बल देता है,जो क्षमता से अधिक प्रदर्शन के लिए उकसाता है।समझने वाली बात है कि बाहरी प्रदर्शन में अपनी ऊर्जा नष्ट करने से क्या फायदा होगा? यदि भीतर सब कुछ ठीक रहेगा, तो बाहर दिखेगा ही दिखेगा। इतना समझ जाएं,तो दिखावे की कोई चिंता नहीं रह जाएगी। मानव जीवन का लक्ष्य है प्रेम। प्रेम से ही श्रद्धा की.उत्पत्ति होती है और इसी से सत्य से साक्षात्कार होता है। अंततः हमारा लक्ष्य इस सत्य तक पहुंचना होता है ।
जो सत्य का व्रती है और तपोनिष्ठ है,उसे कष्ट से डरना नहीं चाहिए। यह स्थापित बात है कि जो कष्ट से डरते हैं,उनसे बड़ा काम नहीं हो पाता। जीवन के हर स्तर पर उनकी हार होती है। कभी सोचा है, मनुष्य की हार क्यों होती है ?
पता लगाने पर मालूम होगा कि उनमें सत्यनिष्ठा और तपस्या नहीं थी। जहां सत्यनिष्ठा और तपस्या होती है,वहां विजय अवश्य होती है।जीवन में किसी भी मनुष्य की तब तक विजय नहीं हो सकती और सत्य से उसका परिचय नहीं हो सकता,जब तक कि वह बुद्धिमान नहीं होता और सत्य का आश्रय नहीं लेता।
बुद्धिमान और बौद्धिक लोग सत्य का आश्रय लेते हैं और उनके बारे में लोग कहते हैं कि उनकी विजय हुई है दरअसल,सत्य मनुष्य को परमात्मा के पास पहुंचाता है। सत्य का अपना घर कहां है? परमात्मा में ही उसका अपना घर है। अगर परमात्मा में ही सत्य का घर है,तो जो उसके साथ हैं,उनकी विजय होगी। फिर भला वे क्यों डरेंगे?
इस दुनिया की किसी भी चीज से वे नहीं डरेंगे। अब जिस विद्यार्थी ने अच्छी तरह से तैयारी कर रखी है,वह परीक्षा से नहीं डरेगा और जिसने तैयारी नहीं की है,वह यहां-वहां आरती करता रहेगा।
परमात्मा से यही गुहार लगाएगा कि प्रभु,अगर आपने जो सत्य का व्रती है,उसे कष्ट से डरना नहीं चाहिए। जो कष्ट से डरते हैं,उनसे बड़ा काम नहीं हो पाता । तपस्या,प्रेम और सत्यनिष्ठा के मार्ग पर चलते हुए ही हम जीवन के लक्ष्यों को पा सकते हैं।
पास नहीं कराया,तो आपके इस भक्त की बेइज्जती होगी। इसे अपने जूनियर साथियों के साथ पढ़ना होगा। तुम अगर ठीक से पढ़ते हो,तो वैसा नहीं होगा। ठीक इसी तरह,जो सत्यनिष्ठ हैं,वे न घबराएंगे,न अधीर होंगे,न ही डरेंगे।
सत्यनिष्ठा,तपस्या और प्रेम के मार्ग पर चलते हुए ही हम जीवन के सच्चे लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं और किसी भी प्रकार की चिंता या डर से मुक्त हो सकते हैं। सत्य और तपस्या के मार्ग पर चलने वाले लोगों को सफलता और शांति अवश्य प्राप्त होती है।
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