Mind-machine Helling
जरूरत है मनोविज्ञान के पेशेवरों की
वर्तमान में चिकित्सकों की तरह ही मनोवैज्ञानिकों की संख्या भी मांग के अनुपात में बहुत कम है। साइकोलॉजी की पढ़ाई आपको इस दुनिया में बतौर पेशेवर स्थापित कर सकती है।मनोविज्ञान एक वैश्विक जरूरत का विषय है,इसीलिए इसकी शिक्षा वैश्विक संभावनाएं भी बनाती है।
साथ ही ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से भी मौके बढ़े हैं। क्या हो राह,बता रही हैं तृप्ति मिश्रा अगर रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट की मानें,तो काउंसिल में बीते वर्ष जुलाई तक भारत में सिर्फ 3372 क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट रजिस्टर्ड थे,जो आवश्यकता से कहीं कम हैं।
वहीं एक लेख के अनुसार साइकियाट्रिक सोशल वर्कर्स भी 1500 ही हैं,जबकि चाहिए 35000 तक। देश में ही नहीं,वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित लोगों की मांग बढ़ी है और इसके प्रति जागरूकता भी ।इसीलिए मनोविज्ञान का क्षेत्र प्रमुख पेशों में से एक गिना जाने लगा है। भारत में रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई) की स्थापना ने इस पेशे को और मजबूत किया है।
क्यों चुनें 20 करियर के नाते इस क्षेत्र में अभी प्रतियोगिता भी कम है और राह तुलनात्मक रूप से आसान भी। मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता,ऑनलाइन थेरेपी और मेंटल हेल्थ ऐप के आने से मनो वैज्ञानिकों की मांग बढ़ी हजार से ज्यादा क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट्स की जरूरत है भारत में इस समय,एक अनुमान के अनुसार । है। वहीं योग्य मनोवैज्ञानिकों की भारी कमी है। प्रति 1 लाख लोगों पर केवल 7 मनोवैज्ञानिक ही हैं।
इस क्षेत्र में अनुभव और योग्यता के साथ आय भी अच्छी होती है। ग्लासडोर इंडिया के मुताबिक साइकोलॉजिस्ट औसतन प्रतिमाह30,000 रुपये कमा सकता है।
कैसे करें शुरुआत
■ 12वीं में साइकोलॉजी हो तो अच्छा,अन्यथा बीए/बीएससी में साइकोलॉजी लें। विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा या सीयूईटी के माध्यम से आगे बढ़ें। पीजी और स्पेशलाइजेशन से विकल्प खुलेंगे। फोरेंसिक,स्पोट्र्स और इंडस्ट्रियल साइकोलॉजी उभरते क्षेत्र हैं।
विशेषज्ञ की राय .....
'ज्यादा मौके क्लीनिकल साइकोलॉजी में हैं। उन्हें थेरेपिस्ट भी कह सकते हैं। किसी अन्य क्षेत्र के थेरेपिस्ट होने के लिए अलग से स्पेशलाइजेशन करना होगा।
आपको अपनी रुचियों का आकलन करके ही स्पेशलाइजेशन चुनना चाहिए। फिर अच्छे संस्थान,कोर्स और इंटर्नशिप के चुनाव पर भी आपकी सफलता निर्भर करेगी।'
डॉ. आरती आनंद,सीनियर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट,सर गंगाराम हॉस्पिटल,दिल्ली क्लीनिकल साइकोलॉजी क्यों चुनें काउंसलिंग का काम क्यों चुनें अच्छी संभावनाओं और प्रतिष्ठा के लिए क्लीनिकल
साइकोलॉजी चुनें। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट का काम मरीज की सोच और व्यवहार से उसके जीवन में आने वाले प्रभावों पर केंद्रित होता है। उसे मेडिसिन देने का अधिकार नहीं होता,पर वे मनो चिकित्सा के गंभीर मामलों,जैसे सिजोफ्रिनिया,ओसीडी आदि में मनोवैज्ञानिक टेस्ट्स,थेरेपी आदि से संबंधित सेवाएं देते हैं।
क्या हो राह : साइकोलॉजी में पीजी डिग्री के बाद क्लीनिकल साइकोलॉजी में दो साल का एम.फिल जरूरी है।फिर रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया में रजिस्ट्रेशन कराना होगा,तभी भारत में प्रैक्टिस कर पाएंगे। मिंट के एक लेख के अनुसार एक साल का प्रोफेशनल डिप्लोमा या चार साल की डॉक्टर ऑफ साइकोलॉजी डिग्री लेकर भी क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट बन सकते हैं। कुछ समय ट्रेनिंग अनिवार्य,जिसमें क्लीनिक्स /अस्पतालों में साइकियाट्रिस्ट के साथ काम करना होगा।
कहां मिलेंगे मौके बतौर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर नेशनल हेल्थ मिशन जैसे सरकारी संस्थानों,रिहैबिलिटेशन सेंटर,विश्वविद्यालय,कॉलेज, क्लीनिक,काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट सामान्य जीवन में रिश्तों की समस्याओं,करियर,भावनाओं के प्रबंधन आदि से संबंधित समस्याओं के लिए सलाह देते हैं।
जैसे मैरिज काउंसलर काउंसलर इलाज संबंधी किसी प्रकार की मेडिसिन या लंबे समय तक थेरेपी नहीं दे सकते।
क्या हो राह : एमए साइकोलॉजी या संबंधित स्पेशलाइजेशन में एमए के बाद काउंसलर और किसी क्षेत्र में विशेषज्ञ के तौर पर प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं। किसी क्षेत्र विशेष के थेरेपिस्ट के लिए संबंधित डिप्लोमा या सर्टिफिकेट लेने ही होंगे,साथ ही किसी सर्टिफाइड ट्रेनर के साथ प्रैक्टिस भी करनी होगी।
अस्पताल,ऑनलाइन हेल्थ सर्विसेज व कॉरपोरेट कंपनियों के एचआर विभागों में मौके मिलते हैं। खुद की प्रैक्टिस कर सकते हैं।काम की बात आरसीआई की वेबसाइट पर आरसीआई एप्रूव्ड कोर्स और संबंधित संस्थान की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यूं तो ऑनलाइन कोर्स भी मौजूद हैं। लेकिन,जानकारों की मानें, तो संभावनाएं बनानी हैं,तो जल्दबाजी के बजाय,ऑफलाइन अच्छे संस्थान को चुनना उचित होगा। थेरेपी के ये क्षेत्र हैं कामके इन दिनों कुछेक विशेषज्ञता क्षेत्रों की मांग में बहुत बढ़ोतरी हुई है,जैसे मैरिज एंड फैमिली थेरेपिस्ट/ साइकोलॉजिस्ट का करियर। बीएलएस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2032 से पहले 10,600 नए पद मैरिज और फैमिली थेरेपिस्ट के लिए निकलेंगे।
वही नशीली दवाओं या किसी प्रकार की लत छुड़ाने वाले एडिक्शन रिकवरी थेरेपिस्ट भी इन दिनों बहुत मांग में हैं। इंडस्ट्रियल/ऑर्गेनाइजेशन साइकॉलॉजिस्ट का काम तेजी पकड़ रहा है,क्योंकि अब हर ऑर्गेनाइजेशन में इनको रखना अनिवार्य होता जा रहा है।
क्या हो राह: एमए साइकोलॉजी के बाद चाइल्ड थेरेपी,फैमिली थेरेपी या संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा या सर्टिफिकेट करना होगा। कम से कम 1 साल की इंटर्नशिप या प्रैक्टिस भी करना जरूरी है।
प्रमुख कोर्स और संस्थान
डिग्री कोर्स ■ साइकोलॉजी में बीए / बीएससी,एमए / एमएसी। क्लीनिकल साइकोलॉजी में एमएससी| एप्लाइड साइकोलॉजी में एमए / एमएससी| क्लीनिकल साइकोलॉजी में एमफिल डिप्लोमा कोर्स क्लिनिकल साइकोलॉजी,रिहेबिलिटेशन थेरेपी,फैमिली थेरेपी,चाइल्ड थेरेपी,कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा प्रमुख संस्थान । दिल्ली यूनिवर्सिटी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी,वाराणसी जामिया मिलिया इस्लामिया,दिल्ली अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी,अलीगढ़ टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज,मुंब इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजिकल रिसर्च,बेंगलुरु पटना महिला कॉलेज,पटना
Email-modimyoginfo007@gmail.com.

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